रुद्राक्ष

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रुद्राक्ष को आध्यात्मिक जगत् में जो सम्मान और श्रद्धा प्राप्त है वह सर्वविदित है। रुद्राक्ष में समाहित दिव्य आध्यात्मिक चमत्कारी शक्ति रुद्राक्ष धारण करने वाले व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा प्रदान कर उसे समृद्धि, शांति और सफलता प्रदान करती है। आप चाहे किसी भी कार्य क्षेत्र से संबंधित हों रुद्राक्ष धारण करने से आप लाभान्वित अवश्य होगें। रुद्राक्ष का संबंध परम कल्याणकारी शिव से है यह शिव का प्रिय आभूषण है। रुद्राक्ष जहाँ गृहस्थ मनुष्यों के लिये सांसारिक सुख और उन्नति प्रदान करने वाला है वहीं यह सन्यासियों को परमानन्द, साधना में सफलता और मोक्ष भी प्रदान करता है। रुद्राक्ष के मुखों के अनुसार शास्त्रों में इसके महत्व और प्रभाव का उल्लेख प्राप्त होता है।

शास्त्रों के अनुसार रुद्राक्ष की उत्पत्ति शिव के नेत्रों से हुई है। त्रिपुरासुर के वध से पूर्व अघोर अस्त्र का चिंतन करते समय शिव के नेत्रों से जल की कुछ बूंदे निकलकर पृथ्वी पर गिर गई और उन्हीं अश्रुरूपी जल से रुद्राक्ष की उत्पत्ति हुई। एक अन्य कथानुसार दक्ष प्रजापति के यज्ञ मे सती द्वारा प्राण त्यागने के फलस्वरूप शिव नेत्रों से जो अश्रुधारा निकली वह जहां-जहां पृथ्वी पर पड़ी वहां-वहां रुद्राक्ष के वृक्ष उत्पन्न हुऐ ।

इस प्रकार ये कथाएं चाहे किसी भी रूप में वर्णित हो किंतु यह तो स्पष्ट है कि रुद्राक्ष की उत्पत्ति शिव नेत्रों से निकले जल से हुई है। रुद्राक्ष, संसार के मनुष्यों को सुख, समृद्धि, उन्नति, शांति, मुक्ति पाने के लिये, शिव द्वारा प्रदान किया गया एक वरदान है। रुद्राक्ष सभी के लिये कल्याणकारी है। रुद्राक्ष एक मुख से लेकर चैदह मुख तक प्राप्त होता है। मुखानुसार रुद्राक्ष का चमत्कारी प्रभाव इस प्रकार है-

 

 एक मुखी रुद्राक्ष-

एक मुखी रूद्राक्ष साक्षात् शिव रूप ही माना जाता है। इस एक मुखी रुद्राक्ष को धारण करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है। शत्रु पीड़ा निवारण, कोर्ट-कचहरी के मामलों में विजय, पदोन्नति आदि की प्राप्ति होती है। इस एक मुखी रुद्राक्ष को धारण करने से उदर विकार (पेट के रोग) से मुक्ति मिलती है।

एक मुखी रुद्राक्ष धारण करने वाले को- ॐ नमः ह्रीं अथवा ॐ नमः शिवाय मंत्र का जाप करना चाहिये। ग्रहों मे यह एक मुखी रुद्राक्ष सूर्य का प्रतिनिधित्त्व करता है। इस को धारण करने से सूर्य ग्रह जनित पीड़ा से भी मुक्ति मिलती है। एक मुखी रुद्राक्ष राजनीति से जुडे व्यक्तियों के लिये एक वरदान है ।

दो मुखी रुद्राक्ष-

दो मुखी रुद्राक्ष शिव-शक्ति का स्वरूप माना जाता है। इसमें समाहित अर्धनारीश्वर की शक्ति रुद्राक्ष धारण करने वाले मनुष्य को मन की शांति और प्रसन्नता, दाम्पत्य जीवन में शांति, प्रेम और संतुलन, शीत जनित रोगों से मुक्ति प्रदान करती है। यह रुद्राक्ष हृदयरोग, फेफड़ों के रोग (खाँसी, श्वास रोग) से भी मुक्ति दिलाता है। दो मुखी रुद्राक्ष चंद्रग्रह का प्रतिनिधित्त्व करता है। इसलिये इसको धारण करने से चन्द्रग्रह जनित पीड़ाओं से भी मुक्ति मिलती है।

तीन मुखी रुद्राक्ष-

तीन मुखी रुद्राक्ष अग्नि स्वरूप है। इस रुद्राक्ष में त्रिदेव- ब्रह्नमा, विष्णु और शिव की शक्ति विद्यमान है। यह रुद्राक्ष जो मनुष्य धारण करता है उसके पापों का विनाश हो जाता है। आत्म विश्वास की वृद्धि होती है। कार्यक्षमता और उत्साह बढ़ता है। हीन- भावना से मुक्ति मिलती है। इससे रक्त विकार, फुन्सियों से मुक्ति मिलती है। तीन मुखी रुद्राक्ष मंगल ग्रह का प्रतिनिधित्त्व करता है। तीन मुखी रुद्राक्ष धारण करने से मंगलग्रह जनित पीड़ाओं से भी मुक्ति मिलती है।

चार मुखी रुद्राक्ष-

चार मुखी रुद्राक्ष चतुर्मुख ब्रह्मा और सरस्वती की शक्ति को अपने में समेटे हुये है। यह रुद्राक्ष धारण करने से शिक्षा के क्षेत्र में, ज्ञान के क्षेत्र में सफलता मिलती है। स्मरण शक्ति बढ़ती है। बुद्धि का विकास होता है। मानसिक रोगों से मुक्ति मिलती है। चार मुखी रूद्राक्ष बुधग्रह का प्रतिनिधि है। इस रुद्राक्ष को धारण करने से बुधग्रह संबंधी पीड़ाओं से मुक्ति मिलती है। विद्वानों, लेखकों, पत्रकारों, विद्यार्थियों को चारमुखी रुद्राक्ष चमत्कारी लाभ प्रदान करता है।

पांच मुखी रुद्राक्ष-

कालाग्नि नाम से प्रसिद्ध पांच मुखी रुद्राक्ष साक्षात् शिव स्वरूप माना जाता है। पांच मुखी रुद्राक्ष धारण करने वाला मनुष्य सभी पापों से मुक्त हो जाता है। यह रुद्राक्ष विषैले जीव-जंतुओं और विष (जहर) से मनुष्य की रक्षा करता है। विचारों में स्थिरता प्रदान करता है। पांच मुखी रुद्राक्ष गुरूग्रह का प्रतिनिधि है। इस रुद्राक्ष को धारण करने से गुरू ग्रह संबंधी पीड़ाओं जैसे-मोटापा, पैरों में कष्ट, मतिभ्रम, गुर्दे-विकार के रोग आदि से छुटकारा मिलता है।

छः मुखी रुद्राक्ष-

छः मुखी रुद्राक्ष भगवान कार्तिकेय की शक्ति से युक्त है। इस छः मुखी रुद्राक्ष को धारण करने से मनुष्य की प्रज्ञा और आंतरिक शक्तियों का विकास होता है। एकाग्रता बढ़ती है। इंद्रियों पर नियंत्रण की शक्ति बढ़ती है। व्यापार-व्यवसाय के क्षेत्र मं सफलता प्राप्त होती है। छः मुखी रुद्राक्ष शुक्र ग्रह का प्रतिनिधि है, इसलिये इस को धारण करने से शुक्र ग्रह संबंधी पीड़ाओं से मुक्ति मिलती है। दाम्पत्य जीवन सुखमय बनता है। स्त्रियों को इसको धारण करने से उन्हें मानसिक और शारिरिक रोगों से मुक्ति मिलती है। मुख, गले के रोग, मूत्र विकार आदि से मुक्ति मिलती है। संसार में सुख-वैभव, स्त्रीसुख, ऐश्वर्य के इच्छुक मनुष्यों को छः मुखी रुद्राक्ष अवष्य धारण करना चाहिये।

सात मुखी रुद्राक्ष-

सात मुखी रुद्राक्ष धारण करने वाला सप्तमातृकाओं और सप्तऋषियों का कृपा पात्र बनता है। सात मुखी रुद्राक्ष धारण करने से अथवा इसकी नित्य पूजा करने से मनुष्य को प्रसिद्धि, आर्थिक लाभ, सम्मान, पदोन्नति, प्राप्त होती है। सातमुखी रुद्राक्ष अकाल मृत्यु का निवारण करता है, पेट के रोग, गठिया, मासपेशियों में जकड़न, मानसिक चिंताओं से मुक्ति प्रदान करता है। सात मुखी रुद्राक्ष शनिग्रह का प्रतिनिधि है। इस रुद्राक्ष को धारण करने से शनि ग्रह जनित पीड़ा भी शांत हो जाती है। व्यापारी एवं शनि पीड़ा (साढ़े-साती आदि) से ग्रस्त व्यक्तियों को सातमुखी रुद्राक्ष अवष्य धारण करें।

आठ मुखी रुद्राक्ष-

आठ मुखी रुद्राक्ष धारण करने वाले व्यक्ति को भगवान गणेश की कृपा विशेष रूप से प्राप्त होती है। आठ मुखी रुद्राक्ष से ज्ञान की प्राप्ति, शासकीय मामलों (कोर्ट-कचहरी, विवाद, पदोन्नती) में शीघ्र सफलता मिलती है। आकस्मिक धन प्राप्ति होती है। रुका पैसा प्राप्त होता है। इस रुद्राक्ष को धारण करने वाले मनुष्य पर तान्त्रिक क्रियाओं का असर नहीं होता है। अष्टमुखी रुद्राक्ष राहु ग्रह संबंधी पीड़ाओं से भी मुक्ति प्रदान करता है। जीवन में उन्नति, विजय आदि सभी प्रकार की सुरक्षा चाहने वाले मनुष्य आठमुखी रुद्राक्ष अवष्य धारण करे।

नवमुखी रुद्राक्ष-

नवमुखी रुद्राक्ष नवदुर्गा की शक्तियों को अपने में समेटे हुये है। नवमुखी रुद्राक्ष धारण करने वाले मनुष्य को वीरता, साहस, शत्रुओं पर विजय और कार्यक्षेत्र में सफलता सहज ही प्राप्त हो जाती है। इस रुद्राक्ष को धारण करने से आध्यात्मिक उन्नति एवं आन्तरिक शक्तियों का जागरण होने लगता है। रोगों से मुक्ति मिलती है। नवमुखी रुद्राक्ष केतु ग्रह संबंधी पीड़ाओं से भी मुक्ति प्रदान करता है। नवमुखी रुद्राक्ष को धारण करना अथवा इसका पूजन करना दोनो ही लाभप्रद होते है। सभी प्रकार की उन्नती और सफलता के इच्छुक मनुष्य नवमुखी रुद्राक्ष अवष्य धारण करें।

दस मुखी रुद्राक्ष-

दस मुखी रुद्राक्ष में भगवान विष्णु की शक्ति समाहित है। दस मुखी रुद्राक्ष धारण करने वाला मनुष्य सभी प्रकार की उन्नति, यश, कीर्ति और सम्पन्नता प्राप्त करता है। दस मुखी रुद्राक्ष तंत्र-मंत्र के बुरे प्रभावों से मुक्ति दिलाता है। दस मुखी रुद्राक्ष सभी पापों से मुक्ति प्रदान करता है। वंशवृद्धि करता है।

दस मुखी रुद्राक्ष पूजा में स्थापित कर नित्य पूजा करने से अथवा धारण करने से सभी प्रकार के लाभ प्राप्त होते है। सभी क्षेत्रों में सुरक्षा, उन्नति, समृद्धि और सन्तान सुख के इच्छुक व्यक्ति को दसमुखी रुद्राक्ष अवष्य धारण करना चाहिये।

 

ग्यारह मुखी रुद्राक्ष-

ग्यारह मुखी रुद्राक्ष को धारण करने वाला अथवा इसका पूजन करने वाला मनुष्य ग्यारह रूद्रों का कृपा पात्र बनता है। भगवान हनुमान जी का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है। यह रुद्राक्ष धारण करने वाला मनुष्य सहस्त्रों यज्ञों का पुण्य प्राप्त करता है। मनुष्य को सभी कार्यो में सिद्धि प्राप्त होती है। श्वास संबंधी रोगों से मुक्ति मिलती है। विजय, सौभाग्य और उन्नति के इच्छुक मनुष्य को ग्यारह मुखी रुद्राक्ष अवश्य धारण करना चाहिये।

बारह मुखी रुद्राक्ष-

बारह मुखी रुद्राक्ष में द्वादश आदित्य और भगवान विष्णु की शक्ति समाहित है। इसको धारण करने वाला मनुष्य, बलवान, तेजस्वी और आकर्षण प्रभाव से युक्त रहता है। यह रुद्राक्ष ब्रहृम हत्या जैसे पापों से मुक्ति प्रदान करने वाला है। यह रुद्राक्ष जंगली जीवों से रक्षा, समस्त रोगों से मुक्ति, सुख, सौभाग्य और दीर्घायु प्रदान करता है। दीर्घायु, आकर्षण प्रभाव, तेजस्विता, सफलता प्राप्त करने के इच्छुक मनुष्य बारह मुखी रुद्राक्ष अवश्य धारण करें।

तेरह मुखी रुद्राक्ष-

तेरह मुखी रुद्राक्ष धारण करने वाला मनुष्य समस्त सांसारिक सुखों को प्राप्त करता है। तेरह मुखी रुद्राक्ष समस्त मनोकामनाओं को पूरा करने वाला है। इस रुद्राक्ष को कामदेव का स्वरूप माना जाता है। इस रुद्राक्ष को धारण करने वाला मनुष्य प्रबल आकर्षण प्रभाव से युक्त होता है उसकी सभी इच्छाएँ पूरी होती है।

चौदह मुखी रुद्राक्ष-

चौदह मुखी रुद्राक्ष साक्षात् शिवरूप ही माना जाता है। इस रुद्राक्ष को धारण करने वाला मनुष्य शिव का सानिध्य प्राप्त करता है तथा उसकी सभी सांसारिक इच्छाएं पूर्ण होती है। इस रुद्राक्ष को धारण करने से आध्यात्मिक साधना के मार्ग में आने वाले विघ्न नष्ट हो जाते है। चौदह मुखी रुद्राक्ष समस्त लोकों, देवी-देवताओं, ज्ञान-अध्यात्मिक शक्तियों को अपने में समाहित किये हुये है। इसका प्रभाव दिव्य है, यह चमत्कारी शक्तियों का स्वामी है। सांसारिक सुख और आध्यात्मिक क्षेत्र में सफलता, शांति, उन्नति और मुक्ति (मोक्ष) के इच्छुक मनुष्य चौदह मुखी रुद्राक्ष अवश्य धारण करें।

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