वास्तु दोष निवारण:

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1) वास्तु का अर्थ :

वास्तु शास्त्र एक विज्ञान है जो हमारे घर और काम के स्थान पर समृद्धि, मानसिक शांति, खुशी और सामंजस्य को प्राप्त करने में मदद करता हैं. वास्तु हमारे चारों ओर उपस्थित विभिन्न ऊर्जा को इस तरीके से कवच के रूप में पिरोता है कि व्यक्ति सदभाव से रहता हैं.

2) वास्तु का फायदा :

अगर ये कहा जाए कि घर की खुशियों की कूंजी वास्तु में छिपी है तो हो सकता है कि आप तुरंत हमारी इस बात पर यकीन न करें. लेकिन जब आप वास्तु का सही अर्थ जान जाएंगे तब आपको इस बात पर यकीन होगा. दरअसल, वास्तु का सही अर्थ है चारों दिशाओं से मिलने वाली ऊर्जा तरंगों का संतुलन. लेकिन कई बार इन तरंगों के असंतुलन से कई दुष्परिणाम सामने आते हैं. आज हम आपको बताएंगे कि इन दुष्प्रभावों से कैसे बचा जा सकता हैं? घर के वातावरण को कैसे खुशहाल बनाया जा सकता हैं? इनके क्या उपाय हैं? कुछ सावधानियां रखकर वास्तु के दुष्परिणामों से कैसे बचा जा सकता हैं?

3) वास्तु दोष निवारण यंत्र :

सम्पूर्ण वास्तु दोष निवारण यंत्र विभिन्न उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए विशेष रूप से बनाया गया हैं. इसमें 13 यंत्र होते है – वास्तु दोष निवारण यंत्र, बगलामुखी यंत्र, गायत्री यंत्र, महामृत्युंजय यंत्र, महाकाली यंत्र, वास्तु महायंत्र, केतु यंत्र, राहु यंत्र, शनि यंत्र, मंगल यंत्र, कुबेर यंत्र, श्री यंत्र, गणपति यंत्र.

4) वास्तु दोष निवारण यंत्र का उपयोग :

इन सभी यंत्रों का उपयोग हमारे जीवन में संतुलन और हमारे बाहरी और आंतरिक वास्तु में सामंजस्य बनाए रखता है और इस प्रकार हमारे जीवन में अधिक से अधिक खुशियाँ रहती हैं.

5) वास्तु पूजा :

वास्तु यंत्र के साथ-साथ वास्तु पुरुष, ब्रह्मा, विष्णु, महेश की पूजा करके, अन्य सभी देवताओं और देवियों की पूजा की जाती हैं. वास्तु पूजा से वातावरण में फैली हुई सभी बाधाओं को खत्म किया जा सकता है अन्यथा जीवन जीने में बाधा उतपन्न हो सकती हैं. वास्तुी अनहोनी, नुकसान और दुर्भाग्य से भी बचाता है. ये घर के साथ-साथ काम के स्थान पर भी उत्तर या पूर्व दिशा में स्थापित किया जा सकता हैं .

6) वास्तु दोष निवारण यंत्र की पूजा कैसे करें :

सबसे पहले नहा -धोकर अपने मन को शांत करें. ये सुनिश्चित कर लें कि यंत्र इस प्रकार रखा हो की आप का मुंह पूर्व दिशा की ओर हो. वास्तु दोष निवारण यंत्र के आगे दीया जला दें. अगर हो सके तो यंत्र के आगे 2 – 3 ताजा फूल रख दें.

7) बीज मंत्र का जाप :

21 बार बीज मंत्र का जाप करें जो यन्त्र के साथ मिला हो. अगर आप संस्कृत नहीं जानते, तो हिंदी या इंग्लिश
में भी आप इसका जाप कर सकते हैं. अब आप जो कुछ भी अपने दिल की इच्छा से मांगना चाहते है उन्हें
ऊंची आवाज में बोलकर अपनी पूजा को समाप्त करें.

8) बीज मंत्र :

बीज मंत्र जो वास्तु दोष निवारण यंत्र के साथ पढ़ा जाता है – “ओम आकर्षय महादेवी राम राम प्रियं हे त्रिपुरे देवदेवेषि तुभ्यं दश्यमि यंचितम ”

9) वास्तु दोष निवारण यंत्र का महत्व :

वास्तु दोष निवारण यंत्र बहुत ही शक्तिशाली यंत्र होता हैं. ये यंत्र किसी भी इमारत की वास्तु में दोष के कारण उत्पन्न होने वाले हानिकारक प्रभावों से निपटने के लिए बहुत प्रभावशाली होता हैं. वास्तु दोष निवारण यंत्र एक ऐसा यंत्र है जो सभी पांच तत्वों-पृथ्वी, जल, वायु, अग्नि और अंतरिक्ष के बीच संतुलन बनाकर हमारे घर और काम के स्थान पर समृद्धि, मानसिक शांति , खुशी और सामंजस्य को प्राप्त करने में मदद करता हैं.

10) वास्तु दोष निवारण यंत्र के लाभ :

वास्तु यंत्र इमारत, कमरे, दरवाजे, खिड़कियां, फर्नीचर आदि के स्थान के से संबंधित लगभग हर दोष पर काबू पा लेता हैं. ये यंत्र लगभग सभी मौजूदा वास्तु दोष के घर, कार्यालय या व्यापार पर पड़े बुरे प्रभावों को घटाता हैं. इन सब बातों का इलाज आसानी से संभव नहीं हो सकता. वास्तु यंत्र न केवल सभी निहित वास्तु दोष का इलाज करके उनके बुरे प्रभावों को दूर करने में मदद करता है , बल्कि सकारात्मक और लाभदायक प्रभाव को भी उत्पन्न करता हैं .

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