नीलम का अधिपति कौन शनि या राहू :

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प्राचीनकाल से ही नीलम को शनि रत्न माना जाता रहा है.

लेकिन इस रत्न की तुरंत प्रतिक्रिया की प्रवृत्ति मन में संदेह उत्पन्न करती है की क्या यह वास्तव में शनि रत्न है.

क्योंकि तुरंत प्रतिक्रिया शनि का स्वभाव नहीं है. शनि एक मंदगामी ग्रह है. इसीलिये इसे शनैश्चर भी कहा गया है.

जबकि तुरंत और अचानक प्रतिक्रिया राहु का स्वाभाव है. राहु नीलवर्णी माना गया है. सभी प्रकार के विषों का अधिपत्य राहु कोप्राप्त है.

इधर ज्योतिष की अपेक्षाकृत नई विधा ‘लाल किताब’ भी नीलम को राहु की कारक वस्तु मानती है.

यह बात नीलम के स्वभाव से मेल खाती है.

प्राचीन मान्यता भी निराधार नहीं हो सकती तो फिर नीलम रत्न का अधिपति कौन है.

शनि या राहु.

राजा दशरथ द्वारा रचित शनि स्तोत्र में शनि को ‘नीलांजन समाभासं’ कहा गया है. नीलांजन नीला थोथा ( Copper Sulphate ) को कहा जाता है जिसका रंग हल्का नीला आसमानी जैसा होता है.

यहां ये जानना भी दिलचस्प होगा की त्वरित प्रक्रिया वाले मामले गहरे नीले रंग के नीलम से ही सम्बंधित होते हैं. हलके रंग के नीलम द्वारा तुरंत प्रतिक्रिया अनुभव में नहीं आती.

ऐसे में कहा सकता है की नीलम रत्न पर दो ग्रहों का आधिपत्य है. रत्न के रंग के अनुसार स्वामित्व बदल जाता है.

हलके आसमानी रंग का नीलम शनि की कारक वस्तु है और गहरे नीले रंग का राहु की.

व्यवहार में भी यही वर्गीकरण सम्यक फल देता अनुभव हुआ है…

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